राजस्थान की आहड़ सभ्यता

आप सभी का इस लेख में स्वागत है इस लेख में हम राजस्थान की आहड़ सभ्यता के बारे में पढ़ने जा रहे हैं अतः इस लेख में आपको आहड़ सभ्यता की संपूर्ण जानकारी प्राप्त होने जा रही हैं।

आहड़ सभ्यता

चलिए इस लेख में सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि यह लेख आपको आहड़ सभ्यता की संपूर्ण जानकारी देने के लिए लिखा गया है।

राजस्थान की आहड़ सभ्यता

राजस्थान की आहड़ सभ्यता की स्थिति खोजकर्ता इसके उपनाम इसके अवशेष इसके बारे में क्या-क्या और जानकारी हमें मिली है वह सब आपको बताने जा रहे हैं।

राजस्थान की आहड़ सभ्यता की स्थिति

सबसे पहले हम राजस्थान की आहड़ सभ्यता की स्थिति के बारे में जान लेते हैं।

आपको मैं बता देना चाहता हूं कि राजस्थान के उदयपुर जिले में आयात और बनास नदी के संगम पर यह स्थित है।

राजस्थान की आहड़ सभ्यता के खोजकर्ता

अभी ऊपर आपने राजस्थान की आहड़ सभ्यता की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की है बात अब हम राजस्थान की आहड़ सभ्यता के खोजकर्ता और उसके उत्खनन कर्ता के बारे में पढ़ने जा रहे हैं।

बता दे की बेटा के प्रथम उत्खनन कर्ता का नाम अक्षय कीर्ति व्यास है जिन्होंने इस का उत्खनन 1953 में करवाया था।

1956 में रतन चंद्र अग्रवाल भी आहड़ सभ्यता के उत्खनन कर्ता रहे हैं बता दें कि 1961 से लेकर 1965 में डॉ एचडी सांगलिया ने भी आहड़ सभ्यता का उत्खनन कार्य करवाया है।

इन्होंने इस सभ्यता का संबंध तुर्की और मध्य एशिया के साथ स्थापित करने का भी प्रयास किया है।

जानकारी बहुत ही मुख्य है जो आपको पता होनी चाहिए कि आहड़ सभ्यता की जो है वह लगभग 4000 वर्ष पुरानी मानी गई है।

आहड़ सभ्यता के उपनाम

अभी तक इस लेख में आपने आहड़ सभ्यता की स्थिति उसके खोजकर्ता उत्खनन कर्ता के बारे में पढ़ लिया है।

अब आप आहट सभ्यता के उपनाम के बारे में भी पढ़ने जा रहे हैं बता दें कि आहड़ सभ्यता को तारावती नगरी भी कहा जाता है।

राजस्थान की आहड़ सभ्यता बनास नदी की घाटी पर स्थित है इसलिए इसे बना संस्कृति भी बताया गया है।

 साथ ही आहड़ सभ्यता को धूल का टीला यानी धूलकोट भी कहा गया है यह इसलिए कहा गया है क्योंकि यहां की स्थानीय और बोलचाल की भाषा में आहड़ सभ्यता को इसी नाम से जाना जाता है।

देखी आहड़ सभ्यता के प्राचीन अवशेषों को इस पीले की धूल ने अपने आंचल में छुपा लिया था आहड़ सभ्यता को आघात पुर सभ्यता भी कहा गया है।

आहड़ सभ्यता के दूसरे नाम वेदपाठक औद्योगिक नगर राजस्थान का मृतकों का टीला b.Ed सभ्यता के हम हैं।

आहड़ भाषा के अवशेष

अभी तक आप इस लेख में राजस्थान की आठ सभ्यता की स्थिति खोजकर्ता और आठ सभ्यता के उपनाम ओं के बारे में भी पढ़ चुके हैं अब आप राजस्थान की आहड़ सभ्यता में मिले अवशेषों के बारे में जानकारी प्राप्त करने जा रहे हैं।

बता दूं कि आहड़ सभ्यता में चावल के साक्ष्य भी मिले हैं यहां पर मिट्टी से बने हुए अनाज रखने के गोरे कोठे भी मिल चुके हैं।

यह भी जानने की कालीबंगा सभ्यता अरावली पर्वत के उत्तर पश्चिमी भाग में हुई थी जबकि आहड़ सभ्यता अरावली पर्वत के दक्षिण पूर्वी भाग में फैली हुई थी।

इसका फैलाव राजस्थान में उदयपुर चित्तौड़गढ़ भीलवाड़ा डूंगरपुर आदि जिलों में हुआ था आपको बता दें कि आहड़ सभ्यता को ग्रामीण सभ्यता माना जाता है ताम्र युगीन सभ्यता थी है।

आपको जरूर ध्यान में रखना है आहड़ सभ्यता के उत्खनन में तांबे के औजार और आभूषण पर्याप्त मात्रा में यानी बहुत ज्यादा मात्रा में मिले हुए हैं।

आपको बता दें कि आहट में टेराकोटा वृषभ आकृति अभी मिली है अब बना ज़ी अनमोल भी कह सकते हैं।

आपको यह भी जान लेना चाहिए कि उदयपुर में मावली तहसील के धोरी नगरी गांव के टीले से मिले अवशेष आहड़ सभ्यता से ही संबंधित है।

आपको बता दूं कि कालीबंगा के निवासी मकान की नींव में आहट वासी श्रेष्ठ नामक पत्थर काम में लेते थे।

चलिए अब आपको यह भी बता दिया जाए की आहट निवासियों ने साथ विभिन्न प्रकार के मृदभांड ओं का आविष्कार किया था प्रमुख काले और लाल रंग का मृदभांड था मृदभांड कई सालों से बनाए जाते थे।

भांडुप को बनाने की सबसे प्रमुख सहेली उल्टी तपाई यानी इनवर्टेड फायरिंग के लगभग 2 की थी बता दें कि भांडुप क्यों काले और लाल रंग में परिवर्तित करने की प्रणाली को फायरिंग अंडर रेडियो सिंह कंडीशन और फायरिंग अंडर द ऑक्सिडाइजिंग कंडीशन कहा जाता था।

मृद-भाण्ड

अब हम बता दें कि काला और लाल प्रकार के गानों के साथ ही गहरे लाल रंग के कलात्मक रूप से उल्लेखनीय होते थे ओके भानु का अलंकरण कई प्रकार से होता था जिनकी पर करनाली नीचे दी गई है कि छत विधि ऊपर से चिपकाए विधि कुरेद कर विधि देखिए आठवां सीता में से कई प्रकार के उपकरण बनाते थे।

आखिर मैं बस यही कहना चाहूंगा कि मुझे उम्मीद है कि आपने इस लेख राजस्थान की आहड़ सभ्यता को बड़े ध्यान से पढ़ा है।

  1. राजस्थान की आहड़ सभ्यता किस जिले में स्थित है?

    उदयपुर जिले में।

  2. राजस्थान की आहड़ सभ्यता के प्रथम उत्खननकर्ता कौन थे?

    अक्षय कीर्ति व्यास

  3. आहड़ सभ्यता का प्रथम बार उत्खनन किस वर्ष में हुआ था?

    1953 में।

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