राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियां

आज इस लेख में राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियां डिफाइन किया गया है अतः अगर आप भी राजस्थान की क्षेत्रीय बोलिया के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो यह के लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहेगा।

राजस्थानी भाषा

चलिए सबसे पहले हम राजस्थानी भाषा के बारे में कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं देखकर भाषा विज्ञान के अनुसार राजस्थानी भारोपीय भाषा परिवार के अंतर्गत आती है।

राजस्थान की क्षेत्रीय बोलियां

10 वीं सदी तक राजस्थानी भाषा पर अब रन स्काई अत्यधिक प्रभाव रहा था यानी अत्यधिक जो विद्वान गुर्जरी अब भ्रंश से इस के उद्भव के पक्ष को अपना मत कि आपको यह भी बता दें कि राजस्थानी भाषा को मरो भाषा मरुवाणी आदि नामों से भी जाना जाता है।

डॉक्टर टेस्टी चोरी ने 1914 से 1916 तक इंडियन एंटीक केरी पत्रिका में माना था कि प्राचीन राजस्थानी और गुजराती एक ही भाषा थी।

ऐतिहासिक व भाषा वैज्ञानिकों के अनुसार के आधार पर राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति गुर्जरी अब रन से हुई मानी जाती है।

राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति

चलिए अब हम राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।

आपको बता दें कि डॉक्टर श्यामसुंदर दास ने बताया है कि राजस्थानी गुजराती के जिसके बाद डॉक्टर एल पी टेस्ट डेट शीट ओहरी ने बताया।

अब भ्रम से उद्भव राजस्थानी भाषा का हुआ है या नहीं राजस्थानी भाषा 12 वीं सदी के अलावा अस्तित्व में आ चुकी थी।

साथी डॉक्टर महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि राजस्थानी भाषा का उद्भव है वह शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है आपको यह भी पता होना चाहिए कि राजस्थान में प्रथम भाषा सर्वेश सर्वेक्षक जॉर्ज मैकलिस्टर थे।

राजस्थानी राजस्थान की मातृभाषा है और हिंदी राजस्थान की राजभाषा है साथी आपको यह भी बता दें कि किस फरवरी को राजस्थानी भाषा दिवस मनाया जाता है।

राजस्थान की बोलियां

चलिए अब हम राजस्थान की बोलियां के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते हैं आपको बता दें कि अब आपको राइट नहीं बोलियों का प्रथम वर्णनात्मक दूरदर्शन 1912 में सर जॉन इब्राहिम नमक विद्वान ने अपने ग्रंथ भारतीय भाषा विश्वकोश क्या था।

उन्होंने सर्वप्रथम राजस्थानी का स्वतंत्र भाषा के रूप में वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया था और इसकी उत्पत्ति नागर अपभ्रंश मानी थी आप डॉक्टर ग्रियर्सन ने लिखा था कि राजस्थानी का शाब्दिक अर्थ राजपूतों के देश राजस्थान या रजवाड़े की भाषा है।

पश्चिमी राजस्थानी 

पहली राजस्थान की बोली यानी पश्चिमी राजस्थान की बात कर लेते हैं जिसका नाम होता है मारवाड़ी पश्चिमी राजस्थान की प्रधान में मानक बोली है।

गुर्जर वंश से मानी जाती है मारवाड़ी का पुराना नाम मरो भाषा है और मारवाड़ी का आलम काल माना जाता है।

उत्तरी पूर्वी राजस्थानी

चलिए अब हम राजस्थान की अगली बोलनी उत्तरी पूर्वी राजस्थानी के बारे में बात कर लेते हैं जिसका नाम मेवाती और अहिरवादी है।

उत्तर पूर्वी राजस्थान में 2 गोली चलती है जो एक है मेवाती और एक है मेवाती अलवर भरतपुर धौलपुर तथा करौली जिलों में प्रचलित है और यह बोली पश्चिमी हिंदी एवं राजस्थान के बीच सेतु के रूप में कार्य करती हैं।

हाथी अहीर वाटी बांगरू एवं मेथी के बीच की बोली है यह बोली अलवर जयपुर में बोली जाती है वही ट्रिकी बोले होने के कारण इसे हीर वाटी अहिरवार भी कहा जाता है।

मध्य पूर्वी राजस्थानी

इसके बाद अब हम राजस्थान की अगली बोल रही मध्य पूर्वी राजस्थानी यानी ढूंढा नी और हाडोती के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।

ढूंढा नी पूर्वी राजस्थान की प्रधान बोली है जिसके उपनाम जयपुरी झाड़ शाही कहीं और कोई भी है जयपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में ढूंढा नहीं बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है।

दक्षिण पूर्वी राजस्थानी

अब हम दक्षिण पूर्वी राजस्थानी मारवाड़ी रामडी और सोनवाड़ी के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं यह है कि संपूर्ण क्षेत्र में इसकी एकरूपता है या नहीं इसका एक ही रूप है।

दक्षिणी राजस्थानी

चलिए इसके बाद हम दक्षिणी राजस्थानी के बारे में भी कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं क्षेत्र में बोली जाती है निमाड़ी को मालवी की बोली माना जाता है निमाड़ी राजस्थानी भी कहा जाता है।

  1. राजस्थान की मातृभाषा क्या है?

    राजस्थानी

  2. राजस्थान की राजभाषा कौन सी है?

    हिंदी

  3. राजस्थानी भाषा का उद्भव किस भाषा से हुआ है?

    शौरसेनी अपभ्रंश से।

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