राजस्थान की जनजातियां व जनजातीय क्षेत्र

आज इस लेख में आपको राजस्थान की जनजातियां के बारे में जानकारी मिलने जा रही हैं आपको राजस्थान की जनजातियां के जनजातीय क्षेत्र यानी वह कहां पर रहते हैं यह भी आपको इस लेख में मिलने वाला है।

राजस्थान की जनजातियां

सबसे पहले हम राजस्थान की जनजातियां के बारे में कुछ सामान्य जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।

डॉ प्रकाश चंद्र मेहता ने बोलो भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान की जनजाति को चार भागों में बांटा हुआ है।

राजस्थान की जनजातियां व जनजातीय क्षेत्र
  •  प्रथम क्षेत्र में राजस्थान का दक्षिणी भाग आता है जिसमें बांसवाड़ा डूंगरपुर उदयपुर और चित्तौड़गढ़ जिलों में भील और डोमार आदि निवास करते हैं।
  • द्वितीय क्षेत्र में सिरोही और पाली जिले आते हैं इनमें गरासिया जनजाति के लोग रहते हैं।
  • तृतीय क्षेत्र में जयपुर सीकर अलवर सवाई माधोपुर करौली और डोसा आते हैं जिनमें मीणा जनजाति के लोग रहते हैं।
  • आखरी अक्षर में बूंदी कोटा बारा और झालावाड़ जिले आते हैं जिनमें सहरिया जनजाति के लोग पाए जाते हैं।

आपको बता दें कि राजस्थान में सर्वाधिक जनजातियां उदयपुर जिले में रहती है कम जनजातियां बीकानेर में तथा जिले की कुल जनसंख्या में प्रतिशत के हिसाब से न्यूनतम जनजातियां नागौर जिले में रहती है।

आपको यह भी पता होना चाहिए कि जनजातियां की दृष्टि से राजस्थान का भारत में छठा स्थान है।

अभी-अभी ऊपर आपने राजस्थान की जनजातियां के बारे में कुछ सामान्य जानकारी प्राप्त की है जिसके बाद अब आप एक-एक करके राजस्थान में रहने वाली जनजातियां के बारे में कुछ सामान्य जानकारी प्राप्त करने जा रहे हैं।

मीणा जनजाति

सबसे पहले जिस जान जनजाति के बारे में हम पढ़ने जा रहे हैं वह है मीणा जनजाति आपको बता दें कि राजस्थान में मीणा जनजाति सबसे अधिक नगरीय क्षेत्र में रहने वाली जनजाति है।

यानी यह नगरीय क्षेत्र में रहती है जनजातियों में राजस्थान में महिलाओं की संख्या ही सर्वाधिक है।

यह संपन्न और शिक्षित जनजाति मानी जाती है आपको बता दें कि मीना शब्द का अर्थ मछली होता है।

मीणा जनजाति में 12 साल 24 खेत 32 तरह और 52000 गोत्र होते हैं 1924 में मीनू को अपराधी जनजाति की संज्ञा दी गई थी।

आपको यह भी बता दें कि मीणा जनजाति को इंजन पावर लेटने दो भागों में विभाजित किया है भाग जागीरदारों का है और दूसरा भाग चौकीदार मीणाओं का है।

  • मीणा जनजाति के लोग सर्वाधिक जयपुर जिले में रहते हैं। 
  • इनका जो देवता है वह भुज देवता है।
  • भूरिया बाबा इनके इष्ट देव माने जाते हैं।
  • जो देवी मानी जाती है वह जीण माता है।

भील जनजाति

ऊपर आपने मीणा जनजाति के बारे में पढ़ा के बाद अब आप भील जनजाति के बारे में जानकारी प्राप्त करने जा रहे हैं।

हवाई ट्राइब्स ऑफ़ इंडिया बुक के अनुसार मारवाड़ को भीलों का मूल निवास स्थान बताया जाता है।

भीलो को 1 पुत्र की संज्ञा भी दी गई है और भी ली व्याकरण ग्रंथ के रचयिता जीएस थॉमसन माने जाते हैं।

बता दे कि राजस्थान में जनजातियों की संख्या की दृष्टि से भीलो का स्थान दूसरा है यानी पहले स्थान पर मीना दूसरे स्थान पर भी लाते हैं।

भीम राजस्थान अधिक उदयपुर जिले में जाएंगे आप को साथ ही भील स्वयं को भोलेनाथ की संतान मानते हैं।

गरासिया जनजाति

अभी-अभी आपने ऊपर भील जनजाति के बारे में पढ़ा अब आप गरासिया जनजाति के बारे में पढ़ने जा रहे हैं आपको बता दें कि कर्नल जेम्स टॉड ने रसिया की उत्पत्ति गवास शब्द से मांग है।

गरासिया स्वयं को भगवान रामचंद्र के वंशज तथा अयोध्या के निवासी निवासी मानते हैं आपको बता दें कि लुकमा का अर्थ उपज के उस थोड़े से अंत से होता है जो आक्रांता द्वारा ग्राहकों को दिया जाता था।

सहरिया जनजाति

चलिए अब हम राजस्थान की अगली जनजाति सहरिया जनजाति के बारे में पढ़ लेते हैं।

आपको बता दें कि शहरी या लोग वाल्मीकि जी को अपना आदि गुरु मानते हैं 12 जिले की बात और किशनगंज तहसीलों में सहरिया जनजाति की 99% से भी ज्यादा जनसंख्या निवास करती है।

हाड़ौती अंचल में भरने वाला सीताबाड़ी का बेल मेला सहरिया जनजाति का कुंभ कहलाता है शहरों में प्रचलित खेल लेंगे होता है।

डामोर

अब इसके बाद हम राजस्थान की अगली जनजाति डामोर के बारे में भी आखिर में पढ़ लेते हैं।

यह राजस्थान की पांचवी बड़ी जनजाति कहलाती है यह जनजाति डूंगरपुर जिले के सीमलवाडा पंचायत समिति तथा बांसवाड़ा जिले में निवास करती है।

आपको बता दें कि डामोर जनजाति को दामोरिया भी कहा जाता है और डामोर जनजाति की जाति पंचायत का मुखिया मुखी कहलाता है।

  1. भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान की जनजाति को कितने भागो में बांटा जाता है?

    चार भागो में बांटा जाता है।

  2. किस जनजाति के लोग वाल्मीकि जी को अपना आदि गुरु मानते हैं?

    सहरिया जनजाति के लोग वाल्मीकि जी को अपना आदि गुरु मानते हैं।

  3. राजस्थान की पांचवी बड़ी जनजाति कौन सी है?

    डामोर पांचवी बड़ी जनजाति है।

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