उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ और विधियां

उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ और विधियां आज इस लेख में आप उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ पढ़ने वाले हैं साथ ही आपको बता दें कि उपचारात्मक शिक्षण की विधियां भी इस लेख में प्रदान की गई है।

उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ

जैसा कि आप जानते ही हैं कि पिछड़े हुए बच्चों का जब हम निदान करते हैं यानी उसको डायग्नोज करते हैं तो हमने उनकी कमियां समुन्नत है।

उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ और विधियां

हम उन कमियों को दूर करने की कोशिश करते हैं कमियों को दूर करने का प्रयास करेंगे तो जिस विधि द्वारा उन कमियों को दूर किया जाएगा उसको हम उपचारात्मक शिक्षण कहते हैं।

अतः जब एक शिक्षक बच्चों की कमियों को दूर करने के लिए दोबारा भाई तो उपचारआत्मक शिक्षण कहते हैं।

साथ ही एक परिभाषा भी उपचारात्मक शिक्षण की आपको पता होनी चाहिए कि उपचारात्मक शिक्षण वास्तव में उत्तम शिक्षण है यानी बेस्ट शिक्षण है जो छात्र को अपनी वास्तविक स्थिति का ज्ञान प्रदान करता है या नहीं है बताता कि वह किस स्तर पर है।

मुझे उम्मीद है कि आप उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ भलीभांति समझ चुके है जिसके बाद अब लेख में आपको उपचारात्मक शिक्षण से जुड़ी अन्य जानकारी भी दी जाएगी।

उपचारात्मक शिक्षण की विधियां

अभी ऊपर आपने उस उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ पड़ा जिसके बाद अब आप उपचारात्मक शिक्षण की विधियों को पढ़ने जा रहे हैं।

सभी विधियां नीचे दी गई है;

  • विद्यार्थियों की व्यक्तिगत विभिन्नताओं के आधार पर छोटे-छोटे समूह बनाकर और उन्हें समूह में बैठकर उनकी गलतियों को दूर करना।
  • दूसरी विधि के अंतर्गत कक्षा के छात्रों की त्रुटियों को दूर करके उनका मार्गदर्शन करने की कोशिश करना।
  • विद्यार्थियों की त्रुटि को यदा-कदा दूर करना यानी कभी-कभी दूर करना।
  • कक्षा के छात्रों को अधिगम संबंधी दोष या कमजोरी या फिर बुरी आदतों का निदान करके उनसे दूर करना।
  • बात आती है कि प्रत्येक विद्यार्थी की फीडबैक करना यानी उनको बताना कि वह कहां गलत है और ताकि समस्या का पता चल सके।

अभी अभी ऊपर आपने उपचारात्मक शिक्षण की विधियां पढ़ी जिससे पहले उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ भी आपको बता दिया गया था।

उपचारात्मक शिक्षण के उपाय

अब तक आप शिक्षण का अर्थ और उपचारात्मक शिक्षण की विधियों के बारे में पढ़ चुके हैं अब आप उपचारात्मक शिक्षण के उपाय पढ़ने जा रहे हैं जिनकी सूची नीचे दी गई है कृपया इसे ध्यान से पढ़े।

  • विद्यार्थी वाचन के समय कोई भी गलती करता है तो उसे हमें बार-बार पढ़ने को कहना चाहिए।
  • साथ ही अगर छात्र कक्षा में गलत उच्चारण करते हैं तो उसको बोलते समय ही तुरंत रोक कर सही उच्चारण उनसे करवाना चाहिए।
  • वाचन संबंधित कमियों को दूर करने के लिए ऐसी शिक्षण सामग्री का उपयोग करना चाहिए जो उनकी डेली लाइफ से जुड़ी हुई होनी चाहिए।
  • अगर कोई भी छात्र लेखन संबंधी त्रुटि करता है तो उसके लिए पुस्तक में से देख कर उनको लिखवाना चाहिए क्योंकि जब बच्चे देख देख कर लिखेंगे तो उनको स्पेलिंग समझ में आ जाएगी।
  • अगर लेखन संबंधी त्रुटि करता है तो उसको दूर करने के लिए श्रुतलेख यानी डिक्टेशन भी एक अच्छी विधि मानी जाती है।
  • आपको बता दें कि शिक्षार्थियों की उच्चारण वाक्य संरचना नियम अपराधों आदि का सही ज्ञान उनको कराना चाहिए।
  • यह भी कहना चाहूंगा कि विद्यार्थियों के शब्द भंडार को बढ़ाने के लिए डिक्शनरी देखने की प्रवृत्ति को भी बच्चों में बढ़ावा देना चाहिए।
  1. उपचारात्मक शिक्षण किसे कहते है?

    जिस शिक्षण द्वारा बच्चो की कमियों को दूर किया जाए वही उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।

  2. उपचारात्मक शिक्षण से पहले क्या किया जाता है?

    बता दे कि उपचारात्मक शिक्षण से पहले डायग्नोज किया जाता है।

  3. उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ क्या है?

    जिस विधि द्वारा व्यक्तियों की कमियों को दूर किया जाएगा उसको हम उपचारात्मक शिक्षण कहते हैं।

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