विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार

आज इस लेख में हम विशिष्ट बालक का अर्थ और विशिष्ट बालकों के प्रकार के बारे में जानकारी प्राप्त करने जा रहे हैं और अगर आप विशिष्ट बालक के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहेगा।

विशिष्ट बालक का अर्थ

चलिए सबसे पहले इस लेख में हम सर विशिष्ट बालक का अर्थ के बारे में ही पढ़ लेते हैं।

बता दें कि विशिष्ट या असाधारण बालक वह बालक होते हैं जो विभिन्न प्रकार के 3 गुणों यानी ट्रेड में सामान्य बच्चों से अलग होते हैं।

विशिष्ट बालक का अर्थ और प्रकार

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो विशिष्ट एक ऐसा यंत्र उचित पद होता है जिसका तात्पर्य किसी भी वैसे बालक से होता है जिसका या जिसकी परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड से ऊपर या नीचे इस हद तक विचलित होती है कि उसके लिए विशेष उसके लिए विशेष शिक्षा के कार्यक्रम की आवश्यकता पड़ती है।

साथ ही अगर मैं बात करूं कि वैसे बालक जो औसत या सामान्य बालक से मानसिक गुणों में ज्ञान गांव में या फिर या फिर आत्मक या शारीरिक गुणों में या फिर सामाजिक व्यवहार में या क्षमताओं में या बहु विकलांगता में विचलित होते हैं तो उनको हम विशिष्ट बालक कहते हैं।

विशिष्ट बालकों के प्रकार

अभी अभी ऊपर आपने लक्खा अर्थ पड़ा जिसके बाद अब आप विशिष्ट बालकों के प्रकारों की सूची पढ़ने जा रहे हैं जो नीचे दी जा रही है जिनको आप ध्यान पूर्वक देखें।

  • प्रवीण बालक
  •  मानसिक रूप से मंद बालक
  •  शिक्षण असमर्थ से ग्रसित बालक
  • व्यवहार लोगों से ग्रसित बालक
  • भाषा दोष से ग्रसित बालक
  • श्रव्य दोष से ग्रसित बालक
  • भूमिक लांटा ग्रसित बालक

ऊपर मैंने आपको विशिष्ट बालकों के प्रकारों की सूची दी है जिसके बाद अब हम विशिष्ट बालकों के बारे में विस्तार से पढ़ने जा रहे हैं।

प्रवीण बालक

सबसे पहले हम विशिष्ट बालकों के प्रकार में प्रति बालक के बारे में पढ़ने जा रहे हैं राधे कि जिन बच्चों या जिन बालकों की बुद्धि लब्धि 120 से ऊपर होती है तो उन बच्चों को हम प्रतिभाशाली बच्चे कहते हैं।

जो बच्चे अपने किसी विशिष्ट क्षेत्र में संपूर्ण हो उसे भी हम भंसाली बालक कह सकते हैं।

प्रवीण बालको की विशेषताएं

अगर हम प्रतिभाशाली बच्चों की विशेषताओं के बारे में बात करें तो उनकी सूची नीचे दी गई है।

  • उत्तम तार्किक चिंतन प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति।
  • समस्या समाधान की अधिक योग्यता।
  • सूचना पर आक्रमण के उच्च गति।
  • सामान्य करण तथा विभेदन करने की सृष्टि योग्यता
  •  सृजनात्मक चिंतन का उच्च स्तर एवं अनुरूप प्रकार का चिंतन
  • लंबी अवधि तक अकेला रहकर अध्ययन करने की वरीयता

मानसिक रूप से मंद बालक

ऊपर आपने प्रतिभाशाली बालकों के बारे में पड़ा उसके बाद अब हम पिछड़े बालक के बारे में पढ़ने जा रहे हैं।

बता दें कि पिछड़े बालक से हमारा तात्पर्य उन बालकों से होता है जो बुद्धि शिक्षा आदि में अपने साथ के बच्चों से काफी पीछे रह जाते हैं।

अगर कहां जाए तो पिछड़े बालक वह होते हैं जो अपने स्कूली जीवन के बीच अपनी आयु के समकक्ष से नीचे की कक्षा का कार्य करने में असमर्थ होते हैं।

विद्यालयों में दो प्रकार से बालक पिछड़ा हुआ हो सकता है कुछ सामान्य पिछड़ेपन हो सकता है और कोई विषय गत पिछड़ापन भी हो सकता है।

पिछड़ेपन के कारण

अभी-अभी आपने ऊपर पिछड़े बालकों के बारे में पढ़ा अब आप बालकों के पिछड़ेपन के कारण के बारे में कुछ बातें जानने जा रहे हैं कि किन कारणों से बालक पिछड़े रह जाते हैं उनकी दी जा रही है।

  • बौद्धिक क्षमता की कमी
  • शारीरिक दोष
  • स्वभाव संबंधी दोष
  1. पिछड़े बालक किसे कहते है?

    जो बुद्धि शिक्षा आदि में अपने साथ के बच्चों से काफी पीछे रह जाते हैं।

  2. प्रवीण बालक किसे कहते है?

    जिन बालकों की बुद्धि लब्धि 120 से ऊपर होती है तो उन बच्चों को हम प्रतिभाशाली बच्चे कहते हैं।

  3. विशिष्ट बालक किसे कहते है?

    वह बालक जो सामान्य बालको से अलग होते है।

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